बवासीर (पाइल्स), गुदा विदर (एनल फिशर) और भगंदर (फिस्टुला) के बारे में जानकारी: आपको क्या पता होना चाहिए
आज की दुनिया में, बहुत से लोग बवासीर (पाइल्स), गुदा विदर (एनल फिशर) और भगंदर (फिस्टुला) जैसी गुदा (एनस) से जुड़ी बीमारियों के साथ चुपचाप जी रहे हैं। वे अक्सर इन तीनों बिमारियों को एक समान ही समझते हैं। इन स्थितियों के कुछ लक्षण समान हो सकते हैं, लेकिन वे अपने कारणों, प्रभावों और उपचार के चलते एक-दूसरे से अलग हैं। भारत में गुदा-मलाशय (एनोरेक्टल ) संबंधी रोग बहुत आम हैं, जो आबादी के एक बड़े हिस्से पर असर डालते हैं। मध्य भारत में किए गए एक अध्ययन में बताया गया है कि गुदा-मलाशय (एनोरेक्टल ) संबंधी रोग के 35.59% मामलों में बवासीर की समस्या थी, जबकि गुदा (एनस) में विदर की समस्या 33.05% थी।
गुदा-मलाशय (एनोरेक्टल ) स्वास्थ्य, आपको पूरी तरह स्वस्थ रहने में एक खास भूमिका निभाता है, फिर भी बवासीर (पाइल्स), गुदा विदर (एनल फिशर) और भगंदर (नाड़ीव्रण/फिस्टुला) जैसी परेशानियाँ को अक्सर गलत समझा जाता है। ये बीमारियाँ गुदा (एनस) और मलाशय (रेक्टम) जगहों पर असर डालती हैं, जिससे असुविधा, दर्द और बाकी के कई लक्षण पैदा होते हैं जो जीवन की क्वालिटी पर बड़े तौर पर असर डालते हैं।
हीलिंग हैंड्स (Healing Hands) में, हमारा मकसद इन परेशानियों को सही ढंग से समझने का है, साथ ही इनका इलाज और मैनेजमेंट के लिए पेड़-पौधों के इस्तेमाल से असरदार हल प्रदान करता है।इस ब्लॉग में, हम बवासीर (पाइल्स), गुदा विदर (एनल फिशर) और भगंदर (फिस्टुला) के बीच के फ़र्क और आपको राहत दिलाने और उपचार को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किए गए उपलब्ध उपचारों पर चर्चा करेंगे।
बवासीर (पाइल्स), गुदा विदर (एनल फिशर) और भगंदर (फिस्टुला) के बारे में जानना
आइये इन गुदा-मलाशय (एनोरेक्टल ) परेशानियों में से हर एक के बारे में फटाफट जानें:
1. बवासीर (पाइल्स) (हेमोर्रोइड्स) क्या है?
बवासीर (पाइल्स), मलाशय (रेक्टम) या गुदा (एनस) में सूजन वाली नसों के होने की स्थिति को कहते हैं। इन्हें अंदरूनी (रेक्टम के अंदर स्थित) या बाहरी (एनल के आसपास) के तौर पर बाँटा जाता है।
- बवासीर (पाइल्स) के कारण: पुरानी कब्ज़, स्टूल (मल) निकलने के दौरान तनाव, लंबे समय तक बैठे रहना, गर्भावस्था, मोटापा और कम फ़ाइबर वाला खाना।
- बवासीर (पाइल्स) के लक्षण: स्टूल निकलने के दौरान खून निकलना, एनल के पास सूजन या गांठ, खुजली और दर्द।
- बवासीर (पाइल्स) के प्रकार: बवासीर (पाइल्स) को बाहरी और आंतरिक बवासीर के रूप में बाँटा गया है, जो कि गुदा नलिका (एनल कैनाल) में एक खास अंतर दर्शाने वाली डेंटेट लाइन के ऊपर और नीचे के स्थान पर आधारित होता है। आंतरिक बवासीर आम तौर पर दिखाई नहीं देते हैं और रक्तस्राव का कारण बन सकते हैं, जबकि बाहरी बवासीर गुदा (एनस) के चारों ओर गांठ के रूप में महसूस किया जा सकता है और दर्द, सूजन और असुविधा का कारण बन सकता है।
- बवासीर की जटिलताएँ: गंभीर मामलों में प्रोलैप्स या थ्रोम्बोस्ड बवासीर (पाइल्स) हो सकती है जिसके लिए शल्य चिकित्सा की ज़रूरत होती है।
आंतरिक बवासीर (पाइल्स) चार वर्गों में बाँटी गई है:
- ग्रेड I: हेमोर्रोइड्स, एनल कैनाल के अंदर ही रहते हैं और बाहर नहीं निकलते। ये कभी-कभी खून निकलने का कारण बन सकते हैं, लेकिन बाहर से दिखाई नहीं देता।
- ग्रेड II: हेमोर्रोइड्स, मल त्याग के समय बाहर निकल आते हैं, लेकिन बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के खुद ही सिकुड़ जाते हैं और कभी-कभी रक्तस्राव भी हो सकता है।
- ग्रेड III: हेमोर्रोइड्स, मल त्याग या शारीरिक गतिविधियों के दौरान बाहर निकल आते हैं और इन्हें वापस अपनी जगह में वापस लाने के लिए हाथ से पीछे धकेलना पड़ता है, और इसमें से खून भी निकल सकता है।
- ग्रेड IV: हेमोर्रोइड्स, स्थाई रूप से बाहर निकल जाते हैं और उसे एनल कैनाल में वापस नहीं धकेला जा सकता। परेशानी होना, खून निकलना और थ्रोम्बोसिस जैसी मुश्किलें सामने आ सकती हैं।
2. गुदा विदर (एनल फिशर) क्या है?
गुदा (एनस) की नाज़ुक सी लाइनिंग में चोट या उसका फटने की वजह से गुदा विदर (एनल फिशर) की तकलीफ़ होती है। इसका फटना या चोट लगना अक्सर स्टूल निकलने के दौरान तनाव की वजह से होता है।
- फिशर के कारण: ठोस स्टूल, लगातार दस्त, प्रसव या एनल इन्फ़ेक्शन।
- फिशर के लक्षण: शौच के दौरान और बाद में तेज़ दर्द, कटाव दिखना, जलन, चमकीला लाल खून और एनल क्षेत्र में कभी-कभी ऐंठन।
- फिशर के प्रकार: तीव्र फिशर के लक्षण 6 हफ़्ते से कम समय तक रहते हैं, जबकि जब लक्षण 6 हफ़्ते से ज़्यादा समय तक बने रहते हैं तो उसे क्रोनिक फिशर की श्रेणी में रखा जाता है।
- फिशर की जटिलताएँ: क्रोनिक फिशर में कटाव के पास स्कार टिश्यू या सेंटिनल पाइल्स (स्किन टैग) बनना।
3. भगंदर (फिस्टुला) क्या है?
गुदा का नाड़ीव्रण (एनल फिस्टुला) एक असामान्य संक्रमित सुरंग जैसा कनेक्शन है जो गुदा नलिका (एनल कैनाल) और आस-पास की त्वचा के बीच विकसित होता है। यह आमतौर पर तब बनता है जब गुदा (एनस) ग्रंथियों में फोड़ा ठीक से ठीक नहीं हो पाता है।
- भगंदर (फिस्टुला) के कारण: क्रोनिक इन्फ़ेक्शन, क्रोहन रोग, ट्यूबरक्लोसिस या एनल फोड़े का इतिहास।
- भगंदर (फिस्टुला) के लक्षण: लगातार दर्द, सूजन, पस का रिसाव, जलन और गंभीर मामलों में बुखार।
- भगंदर (फिस्टुला) की जटिलताएँ: अगर इलाज न किया जाए, तो भगंदर (फिस्टुला) की वजह से बार-बार इन्फ़ेक्शन और फोड़े हो सकते हैं।
नीचे भगंदर (फिस्टुला) के कुछ प्रकारों के बारे में बताया गया है:
- इंटरस्फिंक्टेरिक भगंदर (फिस्टुला): यह गुदा भगंदर (फिस्टुला) का सबसे आम प्रकार है। यह गुदा नलिका (एनल कैनाल) को त्वचा से जोड़ने वाले अंदरूनी और बाहरी एनल स्फिंक्टर्स के बीच होता है।
- ट्रांसस्फिंक्टेरिक भगंदर (फिस्टुला): यह प्रकार अंदरूनी और बाहरी दोनों एनल स्फिंक्टर्स से होकर गुज़रता है। यह ज़्यादा जटिल है और इसमें अक्सर एक लंबा ट्रैक्ट शामिल होता है।
- सुप्रास्फिंक्टेरिक भगंदर (फिस्टुला): यह भगंदर (फिस्टुला) स्फिंक्टर्स के ऊपर से होकर गुज़रता है और गुदा-मलाशय (एनोरेक्टल) रिंग के ऊपर के टिश्यू में मिलता है। इसका इलाज करना ज़्यादा मुश्किल है, जिसके लिए एनल को कारगर रखने के लिए सर्जरी की ज़रूरत हो सकती है।
- एक्स्ट्रास्फिंक्टेरिक भगंदर (फिस्टुला): एक एक्स्ट्रास्फिंक्टेरिक भगंदर (फिस्टुला) एनल स्फिंक्टर्स के बाहर फैलता है और इसमें पैल्विक अंग शामिल हो सकते हैं।
- महिलाओं में पाया जाने वाला भगंदर (फिस्टुला): महिलाओं में पाए जाने वाला भगंदर (फिस्टुला) में असामान्य कनेक्शन होते हैं जो प्रजनन अंगों (फ़ीमेल रिप्रोडक्टटिव ऑर्गन), जैसे वेजाइना, ब्लैडर या रेक्टम पर असर डालते हैं।
बवासीर (पाइल्स), फिशर और भगंदर (फिस्टुला) के बीच तुलना
हालाँकि बवासीर (पाइल्स), गुदा विदर (एनल फिशर) और गुदा भगंदर (एनल फिस्टुला) अलग-अलग परेशानियाँ हैं, लेकिन उनमें एक चीज़ ऐसी है जो सब में समान है: एनल क्षेत्र पर उनका असर अक्सर पुरानी कब्ज़ और स्टूल निकलने के दौरान होने वाली परेशानी से बढ़ जाता है। नीचे दिए गए टेबल में इन तीन परेशानियों के बीच खास फ़र्क के बारे में बात की गई है:
| विशेषता | बवासीर (पाइल्स) | गुदा विदर (एनल फिशर) | भगंदर (फिस्टुला) |
|---|---|---|---|
| कारण | गुदा नलिका (एनल कैनाल) में सूजी हुई नसें | एनल लाइनिंग में चोट | गुदा नलिका (एनल कैनाल) और आस-पास के क्षेत्र की त्वचा के बीच अजीब सा संबंध |
| लक्षण | गुदा (एनस) के आसपास सूजन, खुजली, दर्द, खून निकलना, खासकर स्टूल निकालने के दौरान या उसके बाद में | तेज़ दर्द या खून निकलना | लगातार जलन, दर्द, बार-बार इन्फेक्शन |
| जगह | रेक्टल वेंस (अंदर या बाहर) | गुदा नलिका (एनल कैनाલ) की लाइनिंग | गुदा नलिका (एनल कैनाल) या आसपास की त्वचा |
| इलाज के विकल्प | पाइलोकिट कम्पलीट पाइल्स ट्रीटमेंट किट (PiloKit Complete Piles Treatment Kit) मेडिकल इलाज, लेजर सर्जरी, स्टेपलर सर्जरी | फिशरकिट कम्पलीट फिशर ट्रीटमेंट किट (FissureKit Complete Fissure Treatment Kit) मेडिकल ट्रीटमेंट सर्जरी (LIS) | पोस्ट-सर्जरी हीलिंग के लिए या जब सर्जरी होने में समय देर हो, फिस्टुलोटोमी, डीएलपीएल फिस्टुलाकिट पोस्ट-सर्जरी फिस्टुला केयर किट (FistulaKit Post-Surgery Anal Fistula Care Kit) |
| सामान्य जोखिम के कारण | कब्ज़, गर्भावस्था, मोटापा | कब्ज़, दस्त, चोट | इन्फेक्शन, क्रोहन रोग, फोड़े |
| गंभीरता | हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकता है | हल्के से लेकर गंभीर, परेशानी कितने समय से, उस पर निर्भर करता है | क्रोनिक, भगंदर (फिस्टुला) सर्जरी की ज़रूरत होती है |
हालाँकि ये स्थितियाँ थोड़ी-बहुत एक जैसी हैं, लेकिन उनके कारण, लक्षण और उपचार के तरीके अलग-अलग हैं। बवासीर (पाइल्स) खास तौर से वैस्कुलर (वाहिकाओं संबंधित) समस्या है, फिशर, चोट लगने की वजह से होता है और भगंदर (फिस्टुला) अक्सर इन्फ़ेक्शन की वजह से होता है।
हीलिंग हैंड्स द्वारा उपचार समाधान
हीलिंग हैंड्स में, हमने ऐसे प्रोडक्ट्स बनाए हैं जो इन स्थितियों के बारे में अपने कोर में बातचीत की है। पौधों से मिलने वाली नेचुरल चीज़ों से बने, हमारे इलाज आराम प्रदान करते हैं, उपचार को बढ़ावा देते हैं और दोबारा होने को रोक सकते हैं।
1. पाइलोकिट: कम्प्लीट पाइल्स ट्रीटमेंट किट (PiloKit Complete Piles Treatment Kit)
बवासीर (पाइल्स) के इलाज में मेडिसिन-फर्स्ट नज़रिए से लेकर एडवांस्ड इलाज के तरीकों तक सब शामिल है। शुरुआत में, दवाएँ दर्द, सूजन और बेचैनी जैसे लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं। लक्षणों से राहत और मैनेजमेंट के लिए अक्सर पाइलोकिट कम्प्लीट पाइल्स ट्रीटमेंट किट PiloKit Complete Piles Treatment Kit की सलाह दी जाती है। हर एक पाइलोकिट (PiloKit) में शामिल हैं:
- पाइलोस्प्रे (PiloSpray): दर्द, खुजली और सूजन से राहत के लिए बाहरी इलाज के चलते भारत का पहला पेटेंट प्राप्त और आणविक (मॉलिक्यूलर) रूप से मान्य वनस्पति-आधारित बवासीर स्प्रे।
- पाइलोटॅब (PiloTab): मॉलिक्यूलर रूप से माना हुआ और इलाज के तौर पर 3 गुना तेज़ी से आंतरिक इलाज को बढ़ाने में मदद करती है।
- कॉन्स्टीटॅब (ConsteTab): पेटेंट किया हुआ लाक्साटिव टेबलेट्स का काम स्टूल को रोज़ निकलने में मदद करना, कब्ज़ को रोकना और स्टूल निकलने के दौरान तकलीफ़ को कम करना है।
पाइलोकिट (PiloKit) का उपयोग कैसे करें?
पाइलोस्प्रे (PiloSpray):
- इस्तेमाल से पहले कैन को अच्छी तरह हिलाएँ।
- प्रभावित बवासीर (पाइल्स) के दाने या गुदा (एनस) क्षेत्र पर 5-8 सेमी की दूरी से 2-4 सेकंड के लिए स्प्रे करें।
- बवासीर (पाइल्स) के लक्षणों की गंभीरता के आधार पर, दिन में 2-3 बार या ज़रूरत के अनुसार लगाएँ, अक्सर मल त्याग से पहले और बाद में और सोते समय।
लगाने का तरीका:
गुदा (एनस) क्षेत्र में प्रभावित क्षेत्र पर निम्नलिखित में से किसी भी स्थिति में बाहरी रूप से स्प्रे करें:
- पैर फैलाकर बैठना (स्क्वॉटिंग): नितंब को फैलाएँ और स्प्रे करें।
- खड़े होना: एक पैर पर खड़े हों, दूसरे को उठाएं, नितंब को फैलाएँ और स्प्रे करें।
- लेटना: अपनी तरफ लेटें, एक पैर उठाएं, नितंब को फैलाएँ और स्प्रे करें।
पाइलोटॅब (PiloTab) टैबलेट:
- डोस: भोजन के बाद 1 गोली पानी के साथ लें, एक बार सुबह और एक बार रात में।
कॉन्स्टीटॅब (ConsteTab) टैबलेट:
- डोस: कब्ज की गंभीरता के आधार पर, रात के खाने के बाद 1 या 2 गोलियाँ पानी के साथ लें।
पाइलोकिट (PiloKit) कोर्स:
बढ़िया नतीजों के लिए 30-दिन का कोर्स करना ज़रूरी है। पाइलोकिट (PiloKit) कोर्स को बवासीर (पाइल्स) के लक्षणों की गंभीरता के आधार पर तीन महीने तक लिया जा सकता है। बवासीर (पाइल्स) के इलाज के लिए कई टॉप भारतीय प्रोक्टोलॉजिस्ट द्वारा पाइलोकिट (PiloKit) की सिफ़ारिश की जाती है और बवासीर (पाइल्स) से मुस्कान तक की यात्रा में लाखों रोगियों ने इस पर भरोसा किया है। दवाओं के अलावा, आहार में बदलाव जैसे कि फ़ाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और समय-समय कसरत बवासीर (पाइल्स) को मैनेज करने के लिए ज़रूरी भूमिका निभाते हैं।
2. फिशरकिट कम्पलीट फिशर ट्रीटमेंट किट (FissureKit Complete Fissure Treatment Kit)
विदर (फिशर) का असरदार इलाज और दोबारा न हो, असरदार विदर (फिशर) इलाज इस बात का ध्यान रखता है। हल्के मामलों के लिए, गुदा विदर (फिशर) का इलाज, गुदा विदर (फिशर) को दोबारा होने से रोकने और सेहतमंद रहने पर ध्यान देता है। तेज़ी से रिकवरी और लक्षणों से राहत पाने के लिए अक्सर मेडिसिन-फर्स्ट नज़रिए की सिफ़ारिश की जाती है। फिशरकिट कम्प्लीट फिशर ट्रीटमेंट किट (FissureKit Complete Fissure Treatment Kit) , भारत की पहली पेटेंट की हुई प्लांट-बेस्ड ट्रीटमेंट किट, विदर (फिशर) को असरदार ढंग से मैनेज करने के लिए एक पूरा हल प्रदान करती है। यह पूरी देखभाल के लिए पेटेंट की हुई तीन दवाओं की शक्ति को जोड़ती है:
- पाइलोस्प्रे (PiloSpray): दर्दनाक विदर (फिशर)-कट के लिए पेटेंट किया हुए और पौधों के इस्तेमाल से किया गया एडवांस्ड बाहरी उपचार, काफ़ी राहत प्रदान करता है।
- ऍनोऍक क्रीम: विविध प्रकार के आयुर्वेदिक तेल और भस्मों को एक साथ मिलाकर बनाई गयी ये क्रीम बाहरी उपचार के लिए इस्तेमाल की जाती है जिससे घावों को तेजी से भरने में मदत मिलती है।
- पाइलोटॅब (PiloTab): मॉलिक्यूलर रूप से माना हुआ और इलाज के तौर पर 3 गुना तेज़ी से आंतरिक इलाज को बढ़ाने में मदद करती है।
- कॉन्स्टीटॅब (ConsteTab): मॉलिक्यूलर तौर से मानी हुई और पेटेंट की हुई दवा, जो स्टूल निकलने के दौरान असुविधा को कम करने और तनाव को रोकने के लिए कब्ज़ से राहत देती है।
फिशरकिट (FissureKit) का उपयोग कैसे करें?
पाइलोस्प्रे (PiloSpray):
- इस्तेमाल से पहले कैन को अच्छी तरह हिलाएँ।
- प्रभावित विदर (फिशर) के दाने या गुदा (एनस) क्षेत्र पर 5-8 सेमी की दूरी से 2-4 सेकंड के लिए स्प्रे करें।
- लक्षणों की गंभीरता के आधार पर, दिन में 3 - 4 बार या ज़रूरत के अनुसार लगाएँ, अक्सर मल त्याग से पहले और बाद में और सोते समय।
लगाने का तरीका:
गुदा (एनस) क्षेत्र में प्रभावित क्षेत्र पर निम्नलिखित में से किसी भी स्थिति में बाहरी रूप से स्प्रे करें:
- स्क्वॉटिंग: नितंब को फैलाएँ और स्प्रे करें।
- खड़े होना: एक पैर पर खड़े हों, दूसरे को उठाएं, नितंब को फैलाएँ और स्प्रे करें।
- लेटना: अपनी तरफ लेटें, एक पैर उठाएं, नितंब को फैलाएँ और स्प्रे करें।
ऍनोऍक क्रीम:
लगाने का तरीका:
- गुदा क्षेत्र को हल्के हाथ से धो कर मुलायम कपडे से पोंछ लें।
- क्रीम लगाने से पहले अपने हाथ धो लें।
- प्रभावित भाग पर थोडी मात्रा में ऍनोऍक क्रीम लगाएँ।
- दिन में एक बार लगाएँ: रात को सोते समय।
पाइलोटॅब (PiloTab) टैबलेट:
- डोस: भोजन के बाद 1 गोली पानी के साथ लें, एक बार सुबह और एक बार रात में।
कॉन्स्टीटॅब (ConsteTab) टैबलेट:
- डोस: कब्ज की गंभीरता के आधार पर, रात के खाने के बाद 1 या 2 गोलियाँ पानी के साथ लें।
फिशरकिट (FissureKit) कोर्स:
बढ़िया नतीजों के लिए 30-दिन का कोर्स करना ज़रूरी है। फिशरकिट (FissureKit) कोर्स को विदर (फिशर) के लक्षणों की गंभीरता के आधार पर तीन महीने तक लिया जा सकता है।
विदर (फिशर) के इलाज के लिए कई टॉप भारतीय प्रोक्टोलॉजिस्ट द्वारा फिशरकिट (FissureKit) की सिफ़ारिश की जाती है और लाखों रोगियों ने इसके परिणामों पर भरोसा किया है। दवाओं के अलावा, आहार में बदलाव जैसे कि फ़ाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और समय-समय कसरत बवासीर (पाइल्स) को मैनेज करने के लिए ज़रूरी भूमिका निभाते हैं।
3. फिस्टुलाकिट: एनल फिस्टुला ट्रीटमेंट किट (FistulaKit: Anal Fistula Care Kit)
गुदा भगंदर (फिस्टुला) के इलाज के लिए अक्सर सर्जरी की ज़रूरत होती है, जिसमें फिस्टुलोटॉमी या मुश्किल या जटिल मामलों के लिए ज़्यादा एडवांस्ड प्रोसेस शामिल हैं। फिस्टुलाकिट पोस्ट-सर्जरी एनल फिस्टुला केयर किट FistulaKit Post-Surgery Anal Fistula Care Kit सर्जरी के बाद की देखभाल में खास भूमिका निभाती है, जिससे जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है और गड़बड़ होने के संभावना को कम किया जा सकता है। ऐसे मामलों में जहाँ सर्जरी जल्द संभव नहीं है, फिस्टुलाकिट के इस्तेमाल से लक्षणों को असरदार ढंग से मैनेज करने के लिए किया जा सकता है। इसमें चार खास कंपोनेंट्स एक साथ शामिल किए जाते हैं:
- ऍनोस्प्रे (AnoSpray): एक पेटेंट किया गया गुदा-मलाशय (एनोरेक्टल) स्प्रे जो दर्द, सूजन को कम करने और घाव भरने में मदद करता है।
- टर्मोसिन प्लस (Turmocin Plus): मॉलिक्यूलर रूप में मानी हुई मान्य कर्क्यूमिन टैबलेट, जो सूजन कम करने लिए जानी जाती है, जो टिश्यू की मरम्मत और सूजन को कम करने में मदद करती है।
- ऍनोऍक-एच (Anoac-H): यह एक पेटेंट की गई गुदा-मलाशय (एनोरेक्टल) टैबलेट है जिसे इन्फ़ेक्शन को मैनेज करने और पूरे इलाज में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- कॉन्स्टॅकटॅब (ConstacTab):पेटेंट किया हुआ लाक्साटिव कॉन्स्टॅकटॅब (ConstacTab) का काम स्टूल को रोज़ निकलने में मदद करना, कब्ज़ को रोकना और स्टूल निकलने के दौरान तकलीफ़ को कम करना है।
फिस्टुलाकिट (FistulaKit) का उपयोग कैसे करें?
ऍनोस्प्रे (AnoSpray):
- इस्तेमाल से पहले कैन को अच्छी तरह हिलाएँ।
- प्रभावित बवासीर (पाइल्स) के दाने या गुदा (एनस) क्षेत्र पर 5-8 सेमी की दूरी से 2-4 सेकंड के लिए स्प्रे करें।
- लक्षणों की गंभीरता के आधार पर, दिन में 2-3 बार या ज़रूरत के अनुसार लगाएँ, अक्सर मल त्याग से पहले और बाद में और सोते समय।
लगाने का तरीका:
गुदा (एनस) क्षेत्र में प्रभावित क्षेत्र पर निम्नलिखित में से किसी भी स्थिति में बाहरी रूप से स्प्रे करें:
- स्क्वॉटिंग: नितंब को फैलाएँ और स्प्रे करें।
- खड़े होना: एक पैर पर खड़े हों, दूसरे को उठाएं, नितंब को फैलाएँ और स्प्रे करें।
- लेटना: अपनी तरफ लेटें, एक पैर उठाएं, नितंब को फैलाएँ और स्प्रे करें।
टर्मोसिन प्लस (Turmocin Plus) टैबलेट:
- डोस: भोजन के बाद 1 गोली पानी के साथ लें, एक बार सुबह और एक बार रात में।
ऍनोऍक-एच (Anoac-H) टैबलेट:
- डोस: कब्ज की गंभीरता के आधार पर, रात के खाने के बाद 1 या 2 गोलियाँ पानी के साथ लें।
कॉन्स्टॅकटॅब (ConstacTab) टैबलेट:
- डोस: कब्ज की गंभीरता के आधार पर, रात के खाने के बाद 1-2 गोलियाँ पानी के साथ लें।
ऐसे मामलों में जहाँ सर्जरी की एकदम संभव नहीं है, फिस्टुलाकिट (FistulaKit) का इस्तेमाल लक्षणों को असरदार ढंग से मैनेज करने के लिए किया जा सकता है।
रोकथाम और सुधार के लिए लाइफ़स्टाइल से जुड़े सुझाव
हमारे प्रोडक्ट्स के साथ लाइफ़स्टाइल में कुछ बदलाव करने से इलाज से आने वाले सुधारों में तेज़ी आ सकती है और बीमारी की रोकथाम हो सकती है:
- डाइट और हायड्रेशन: फल, सब्जियाँ और साबुत अनाज जैसे ज़्यादा फ़ाइबर वाली चीज़ें खाएँ। सख़्त मल को रोकने के लिए हर रोज़ कम से कम 8-10 गिलास पानी पानी ज़रूरे पीएँ।
- साफ़-सफ़ाई: इन्फ़ेक्शन को रोकने के लिए सही एनल साफ़-सफ़ाई बनाए रखें, खासकर भगंदर (फिस्टुला) के मामलों में। ज़्यादा कठोर साबुन के इस्तेमाल करने से त्वचा में जलन पैदा हो सकती है।
- कसरत: हर रोज़ स्टूल निकलने के लिए सैर करें या योग जैसे हल्की कसरत करें। भारी वज़न न उठाएँ क्योंकि इससे पाइल्स बिगड़ सकता है।
- ज़ोर लगाने से बचें: अगर ज़रूरी हो तो स्टूल सॉफ़्नर का इस्तेमाल करें। शौचालय में ज़्यादा समय न लगाएँ, क्योंकि इससे बवासीर (पाइल्स) बिगड़ सकती है।
हीलिंग हैंड्स (Healing Hands) ही क्यों?
जबकि बवासीर (पाइल्स), गुदा विदर (एनल फिशर) और भगंदर (फिस्टुला) तकलीफ़देह हो सकते हैं और कभी-कभी परेशानी की वजह भी बंद सकते हैं, वे सही इलाज और प्रिवेंटिव तरीकों के साथ मैनेज किए जा सकते हैं। हीलिंग हैंड्स (Healing Hands) में हमारे प्रोडक्ट्स आपकी सेहत से जुड़ी अनोखी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए खास तौर पर बनाई गई हैं, जो गुदा-मलाशय (एनोरेक्टल) देखभाल के लिए असरदार और वैज्ञानिक रूप से मानी हुई हैं। हीलिंग हैंड्स में, हम गुदा-मलाशय (एनोरेक्टल) सेहत बनाए रखने के लिए असरदार और नेचुरल उपाय प्रदान ककरते हैं। नीचे बताया गया है कि क्यों आप हम पर भरोसा कर सकते हैं:
- नेचुरल फॉर्मूलेशन: सभी प्रोडक्ट, पौधों से मिलने वाली सामग्री से तैयार किए गए हैं, जिनमें नुक्सानदेह केमिकल्स नहीं होते हैं।
- कॉम्प्रेहेंसिव नज़रिया: हम लॉन्ग-टर्म राहत के लिए इन स्थितियों के खास कारणों को पहचान करते हैं।
- माने हुए इलाज और पेटेंट समाधान: हमारी दवाएँ और किट पूरे क्लिनिकल रिव्यू के बाद तैयार की गई हैं और ये भारत के पहले पेटेंट और गुदा-मलाशय (एनोरेक्टल) परेशानियों के लिए हैं मॉलिक्यूलर तौर पर मानी हुई है रूप से मान्य
- पेशेंट-फर्स्ट फ़िलोसोफ़ी: हमारे प्रोडक्ट आसान इस्तेमाल और तेज़ नतीजों के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
- डॉक्टरों के सहयोग से विकसित: ये दवाइयाँ भारत की टॉप प्रॉक्टोलॉजी और जीआई अस्पताल चेन, हीलिंग हैंड्स (Healing Hands) क्लिनिक के साथ मिलकर, प्रमुख डॉक्टरों की साझेदारी में विकसित की गई हैं।
- डॉक्टर द्वारा सुझाए गए समाधान: असरदार और सुरक्षित इलाज के लिए प्रोफ़ेशनल और डॉक्टरों का भरोसेमंद।
आखिर में
बवासीर (पाइल्स), गुदा विदर (एनल फिशर) और भगंदर (फिस्टुला) बड़ी बीमारियां महसूस हो सकती हैं, लेकिन हमारे प्रमाणित किट - पाइलोकिट, फिशरकिट और फिस्टुलाकिट, सही समय पर देखभाल और इलाज से इन्हें असरदार ढंग से मैनेज किया जा सकता है। हीलिंग हैंड्स (Healing Hands) में हम आपकी ज़रूरतों के हिसाब से सुरक्षित, पौधों के इस्तेमाल से बनी दवाओं से असरदार इलाज और हल प्रदान करते हैं।
चुपचाप तकलीफ़ सहना बंद करें और तंदुरुस्त, दर्द-मुक्त ज़िंदगी की ओर आगे बढ़ें। हमारे प्रोडक्ट्स की रेंज देखें और बवासीर (पाइल्स), गुदा विदर (एनल फिशर) और भगंदर (फिस्टुला) के लिए हमारे होलिस्टिक और एडवांस्ड इलाज के विकल्पों के बारे में और जानें। अभी ऑर्डर करें और फ़र्क महसूस करें! (Order now and feel the difference!)